नरोदा पाटिया दंगे के गुनहगारों की सजा का ऐलान कर दिया गया है। गुजरात की पूर्व मंत्री माया कोडनानी को 28 साल कैद जबकि बजरंग दल के नेता बाबू बजरंगी को उम्र कैद की सजा सुनाई गई है।
गोधरा में ट्रेन जलाने की घटना के बाद 28 फरवरी 2002 को नरोदा पाटिया में हुए दंगे में कोर्ट ने 62 में से 32 लोगों को दोषी करार दिया था। 29 को रिहा कर दिया गया, जबकि एक की सुनवाई के दौरान ही मौत हो गई।
दोषी करार दिए जाने वालों में बीजेपी की विधायक और गुजरात की पूर्व मंत्री माया कोडनानी और बजरंग दल के नेता बाबू बजरंगी भी शामिल हैं। कोडनानी और बजरंगी पर धारा 120बी यानी आपराधिक साजिश रचने और दफा 320 यानी हत्या का आरोप साबित हुआ है।
नरोदा पाटिया के दंगों में 97 लोग मारे गए थे। इस केस में कुल 327 लोगों की गवाही के बाद कोर्ट ने इन आरोपियों को दोषी पाया। नरोदा पाटिया केस गुजरात दंगों के उन नौ मामलों में एक है, जिसकी जांच एसआईटी ने की थी।
गुजरात दंगों के साढ़े दस साल बाद कोर्ट में असलियत सामने आ चुकी है। भले ही ये फैसला आखिरी न हो, लेकिन इतना जरूर है कि दंगे में बीजेपी विधायक और बजरंग दल के कार्यकर्ता के कसूरवार पाए जाने के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की सियासी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
कोडनानी और बजरंगी को भादंसं की धारा 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र), 302 (हत्या) और 307 (हत्या का प्रयास) के तहत दोषी करार दिया गया। अभियोजन पक्ष ने सभी दोषियों के लिए मौत की सजा की मांग की थी।
गौरतलब है कि गोधरा रेलगाड़ी हत्याकांड मामले में अदालत ने 31 लोगों को सजा सुनाई और 63 को बरी कर दिया। सरदारपुरा मामले में अदालत ने 31 को सजा सुनाई और 42 को बरी कर दिया, जबकि दीप्दा दरवाजा मामले में 22 को सजा सुनाई और 61 को बरी कर दिया था।
गोधरा में ट्रेन जलाने की घटना के बाद 28 फरवरी 2002 को नरोदा पाटिया में हुए दंगे में कोर्ट ने 62 में से 32 लोगों को दोषी करार दिया था। 29 को रिहा कर दिया गया, जबकि एक की सुनवाई के दौरान ही मौत हो गई।

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