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Wednesday, 16 May 2012

मनरेगा का लेखा-जोखा इसी साल नवम्बर में संसद में पेश किया जाएगा

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने सोमवार को कहा कि सभी राज्यों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत चल रहे कार्यो का लेखा-जोखा इसी साल नवम्बर में संसद में पेश किया जाएगा। 
राज्यसभा में एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने बताया कि सभी राज्यों में लेखा-परीक्षा का काम जारी है और उनके मंत्रालय को इसकी रिपोर्ट अक्टूबर के अंत तक मिल जाएगी। मनरेगा के कार्यो की लेखा-परीक्षा में 2007 से 2011 तक की अवधि को शामिल किया गया है और इसमें यह निश्चित तौर पर उल्लेख किया जाएगा कि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय इस योजना पर हर साल लगभग 40 हजार करोड़ रुपये खर्च करता है। 
उन्होंने बताया कि सभी ग्राम पंचायतों को इस साल से नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) द्वारा जिला स्तर पर तैयार किए गए पैनल के चार्टर्ड एकाउंटेंट द्वारा प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य होगा। कुछ राज्यों में ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में व्याप्त भ्रष्टाचार का जिक्रकरते हुए उन्होंने कहा कि इसे दूर करने के लिए केंद्र बहुत अधिक कुछ नहीं कर सकता, भ्रष्टाचार से लड़ाई का प्रमुख दायित्व राज्य सरकारों, विशेषकर ग्राम पंचायतों पर है। 
उन्होंने बताया कि मनरेगा में यदि कोई अनियिमतता होती है तो केंद्रीय दल राज्य सरकारों को उसे ठीक करने के लिए सचेत करता है और उचित सलाह देता है।

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