लखनऊ। उत्तर प्रदेश के लोगों के घर का बजट जल्द ही बिगड़ने वाला है। आटा और चीनी के दाम बढ़ने के बाद अब बिजली भी महंगी होने वाली है। वो भी इसी महीने।
पिछले दिनों सरकार ने कैबिनेट की बैठक में इलेक्ट्रिक ड्यूटी में बढ़ोत्तरी कर दी थी। इलेक्ट्रिक डयूटी में बढ़ोत्तरी करने के साथ ही सरकार की आय तो प्रतिमाह 650 करोड़ रुपए बढ़ जाएगी लेकिन मंहगाई के इस दौर में उपभोक्ताओं की कमर और झुक जाएगी।
कहने को तो अखिलेश सरकार आम आदमी के लिए काम कर रही है लेकिन हकीकत में ऐसा कुछ नहीं है। आम आदमी के ऊपर सरकार ने एक बड़ा बोझ डाल दिया है जिसके बाद मंहगाई की मार झेल रहे आम आदमी पर और अधिक दबाव हो गया है।
सरकार ने बिजली की दरों को बढ़ाने का नायाब तरीका खोजते हुए इलेक्ट्रिक डयूटी में बढ़ोत्तरी की क्योंकि इसे बढ़ाने व घटाने का अधिकार सरकार के पास ही है जबकि यदि टैरिफ में और कोई बदलाव करना होता पावर कारपोरेशन को प्रस्ताव बनाकर विद्युत नियामक आयोग को भेजना होता।
कई परीक्षणों के बाद तथा संगठनों की आपत्तियों का जवाब देने के बाद ही दरों में बढ़ोत्तरी हो पाती लेकिन सरकार ने इस बातों को दरकिनार करते हुए डयूटी बढ़ाकर लोगों को झटका दे दिया। अब तो विद्युत नियामक आयोग के हाथ कुछ रहा भी नहीं।
कैबिनेट ने इस बढ़ोत्तरी पर सहमति की मुहर लगा दी है जिसके तहत डयूटी 9 पैसे से बढ़ाकर 5 प्रतिशत कर दी गयी है। अब तो इस इंतजार है सरकारी गजट के जिसके साथ ही नयी दरों पर बिल की वसूली आरम्भ हो जाएगी। अधिकारी बताते हैं कि गजट अभी तक नहीं आया है लेकिन दो चार दिनों में गजट आ जाएगा जिसके बाद बिलिंग साफ्टवेयर में बदलाव कर दिया जाएगा।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद इलेक्ट्रिक ड्यूटी में की गयी बढ़ोत्तरी को वापस लिए जाने की मांग कर रहा है लेकिन उसकी मांग का सरकार पर कोई प्रभाव नहीं पडऩे वाला। गुपचुप ढंग से की गयी इस बढ़ोत्तरी के विषय में सरकार का तर्क है कि कई वर्षों से ड्यूटी में बढ़ोत्तरी नहीं की गयी थी जिस कारण यह आवश्यक थी।
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