देश के राजनीतिक दलों ने 2004 के बाद से चंदा और अन्य स्रोतों से 4,662
करोड़ रुपये की कमाई की है. दो एनजीओ ने दावा किया कि 2,008 करोड़ रुपये की
कमाई के साथ सत्तारूढ कांगेस सूची में शीर्ष पर है जबकि मुख्य विपक्षी दल
भाजपा 994 करोड़ रूपये की कमाई के साथ दूसरे पायदान पर है.
आयकर रिटर्न और 2004 -2011 के दौरान चुनाव आयोग को दानकर्ताओं की दी गई
सूची के आधार पर एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स और नेशनल इलेक्शन वाच
ने 23 बड़ी पार्टियों के आय की रिपोर्ट जारी की.
उन्होंने कहा कि 2004 के बाद राजनीतिक दलों की आय में लगातार बढोतरी देखी
गई. इन आंकड़ों में कहा गया कि कांग्रेस की आय 2,008 करोड़ रुपये है जो कि
2004 से 2011 के दौरान केंद्र की सत्ता संभालने के बीच मुख्यत: ‘कूपनों’ की
बिक्री के माध्यम से आई. दानकर्ताओं से कमाई का अंश महज 14.42 फीसदी रहा.
एनजीओ ने कहा कि इसके उलट, भाजपा की कुल 994 करोड़ रुपये की कमाई का 81.47
फीसदी हिस्सा कॉपरेरेट घरानों और लंदन स्थित वेदांता सहित बडी कंपनियों के
मालिकाना हक वाले ट्रस्टों से आया.
एनजीओ ने कहा कि अधिकतर राजनीतिक दलों की आय का मुख्य स्रोत चंदा और
स्वैच्छिक योगदान रहा और उन्होंने कॉरपरेट घरानों द्वारा संचालित चुनावी
न्यासों के कामकाज में और पारदर्शिता की मांग की.
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को लोक प्राधिकार घोषित किया जाना चाहिए.
एडीआर ने कहा, ‘यह राजनीतिक दलों का ब्लैक बॉक्स है. इस देश में भ्रष्टाचार
का मूल स्रोत राजनीतिक चंदा है. राजनीतिक चंदे का नियमन कर हम भ्रष्टाचार
को खत्म तो नहीं कर सकते लेकिन बहुत हद तक कम कर सकते हैं.’
दिलचस्प यह रहा कि टोरेंट पावर लिमिटेड और आदित्य बिरला समूह के जनरल
इलेक्टोरल ट्रस्ट ने कांग्रेस और भाजपा दोनों को चंदा दिया. जीईटी ने
कांग्रेस को 36.4 करोड़ रुपये दिए जबकि भाजपा को उसने 26 करोड़ रुपये का
चंदा दिया.
कांग्रेस और भाजपा जैसी बड़ी पार्टियों को जहां बड़े कारपरेट घरानों और
न्यासों से चंदा मिला, द्रमुक जैसे क्षेत्रीय दलों ने अपने पार्टी समर्थकों
से लाखों रुपये का चंदा पाया.
आश्चर्यजनक तौर पर, माकपा की कमाई 2004-2011 के बीच 417 करोड़ रुपये रही
जिनमें ज्यादातर योगदान 20,000 रुपये से कम का योगदान देने वाले व्यक्तियों
का रहा.
माकपा, बसपा की 484 करोड़ रुपये की कमाई के थोड़ा ही पीछे रही जबकि अन्य
बड़े वाम दल भाकपा ने केवल 6.7 करोड़ रुपये कमाए. एनजीओ के मुताबिक सपा ने
278 करोड़ रुपये की कमाई की.
कांग्रेस को चंदा देने वाले मुख्य दानकर्ताओं में टोरेंट पावर लिमिटेड
(14.15 करोड़ रुपये), एयरटेल का भारती इलेक्टोरल ट्रस्ट (11 करोड़ रुपये),
टाटा का इलेक्टोरल ट्रस्ट (नौ करोड़ रुपये), स्टरलाइट इंडस्ट्रीज (छह करोड़
रुपये), आईटीसी (पांच करोड़ रुपये), अडानी इंटरप्राइजेज, जिंदल स्टील और
वीडियोकोन एपलाएंसेंस रहे.
भाजपा की आय में बड़ा हिस्सा जीईटी के चंदे (26 करोड़ रुपये) का रहा जिसके
बाद टोरेंट पावर लिमिटेड (13 करोड़ रुपये) और पब्लिक एंड पोलिटिकल अवेयरनेस
सेंटर (9.5 करोड़ रुपये) का रहा. एनजीओ ने इस सेंटर के वेदांता से जुड़े
होने का दावा किया.
एक और रोचक तथ्य सामने सामने आया कि एशियानेट टीवी होल्डिंग ने पिछले सात
सालों में भाजपा को 10 करोड़ रुपये दिए जबकि कांग्रेस को ढाई करोड़ रूपये
का चंदा दिया.
एनजीओ ने कहा कि 18 क्षेत्रीय और प्रादेशिक पार्टियों ने 2004 के बाद से
चुनाव आयोग में दानकर्ताओं की सूची जमा नहीं कराई. इन दलों में नेशनल
कांफ्रेंस, तृणमूल कांग्रेस और इनलोद शामिल हैं.

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